বাংককের সকালে আলো শুধুই? আমি তোমার চামড়ায়ের ভিতরেই প্রশ্নটা! 😅 দেখলি? না। এইটা ‘আর্ট’? না। এটা ‘হওয়া’—যখন ‘অসম্ভব’… পিছনের 24-70% -এইতেই ‘ছোড়ায়’! 🌅 হ্যাঁ! ভিতরেই ‘শুধু’… আমি ‘ফিট’… তবে ‘চমড়া’? তোমার ‘হওয়া’?! 🌞 তখন ‘চমড়া’… জিন্দ্রি… পথটি! আমি চলছি!
अरे भाई, ये सब ‘art’ है? मैंने तो सोचा कि कोई फोटोशॉप में पोज़ करके खड़ी हुई… पर यहाँ तो सिर्फ़ सांस की हल्की हिलचल में एक पुराना सिलेंस है! 🌅 बैंगकॉक की सुबह का प्रकाश… कभी-कभी मेरी त्वचा पर ‘मधु’ बहता है। आज किसने मुझे ‘NFT’ कहा? देखो — मैंने सिर्फ़ सांस लिया। अगलय – मुझे पढ़ने के लिए? #QuietPoetry #NoFilterJustBreath
On a entendu dire que la vie est une publicité… mais non ! Ici, le silence n’a pas de like-discount : il a du prix en poésie silencieuse. Tu crois qu’elle postait ses émotions sur Instagram ? Non — elle les tissait dans la brume du matin, entre deux respirations. Personne ne l’a vue… mais tu as senti ta peau frémir ? C’est ça l’art : quand personne ne regarde, c’est toi qui comprends.
Et toi ? Tu te souviens de ton dernier soupir ?



